🚩 विजयादशमी उत्सव 2025 : संगठन, समरसता और शताब्दी संकल्प 🚩
स्थान: रवींद्र मंडल, जोरबाग नगर (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)
मुख्य वक्ता: श्री जनमेजय (सह जिला कार्यवाह)
पवित्र भगवा ध्वज के सान्निध्य में, मंचासीन अतिथियों, सह विभाग संघचालक जी, सज्जन वृंद, मातृशक्ति और देवदुर्लभ स्वयंसेवक बंधुओं की उपस्थिति में विजयादशमी उत्सव 2025 हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया।
विजयादशमी संघ के छह प्रमुख उत्सवों में से एक है। यह दिन शक्ति, धर्म और संगठन की विजय का प्रतीक है। अश्विनी शुक्ल दशमी के इस पावन अवसर पर नवरात्र की शक्ति उपासना का समापन होता है।
📜 चार युगों से जुड़ी विजयादशमी
- सत्ययुग: महिषासुर मर्दिनी दुर्गा की असुर पर विजय।
- त्रेतायुग: भगवान श्रीराम द्वारा असत्य और अधर्म का संहार।
- द्वापरयुग: पाण्डवों का शस्त्र पूजन — धर्म और न्याय की रक्षा के लिए।
- कलियुग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, 1925 — “सङ्घे शक्तिः कलियुगे”
🕉 संघ की 100 वर्षों की यात्रा
संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
1925 में पूजनीय डॉ. हेडगेवार जी ने संगठन की नींव रखी और श्री गुरुजी के नेतृत्व में यह राष्ट्र जीवन के विविध क्षेत्रों में प्रविष्ट हुआ।
चार कालखंडों की यात्रा:
1️⃣ 1925–1940: बीजारोपण और युवाओं का संगठन।
2️⃣ 1940–1975: विस्तार, विभाजन, आपातकाल जैसी चुनौतियों के बीच समाज का विश्वास अर्जन।
3️⃣ 1975–2000: समाजव्यापी कार्य, रामजन्मभूमि आन्दोलन और राष्ट्रीय मुद्दों में सक्रिय भागीदारी।
4️⃣ 2000 से अब तक: समाज और संघ का एक ही मंच पर आना, सेवा कार्य, धारा 370 का खंडन, श्रीराम जन्मभूमि पर प्राण प्रतिष्ठा।
आज संघ समाज के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सेवा कार्यों में समानांतर रूप से खड़ा है।
⚔️ संघ के सामने चुनौतियाँ
- धार्मिक उग्रवाद (जिहाद)
- डीप स्टेट और छिपी राजनीतिक शक्तियाँ
- अर्बन नक्सल गतिविधियाँ
- सांस्कृतिक मार्क्सवाद
- देशविरोधी आंदोलन
👉 संघ और स्वयंसेवक इन सब मोर्चों पर समाज में जागरूकता, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का संचार कर रहे हैं।
🌿 शताब्दी संकल्प और पंच परिवर्तन
संघ ने शताब्दी वर्ष में पाँच प्रमुख परिवर्तनों को अपनाने का आह्वान किया है:
- सामाजिक समरसता – भेदभाव और जातिवाद का उन्मूलन।
- पर्यावरण चेतना – जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवन।
- कुटुंब प्रबोधन – सुसंस्कृत पारिवारिक व्यवस्था और सामूहिक जीवन।
- स्वदेशी आचरण – भजन, भोजन, भाषा, वेश, व्यवहार में स्वदेशी अपनाना।
- नागरिक शिष्टाचार – संविधान और परंपराओं का सम्मान।
शताब्दी वर्ष के विशेष कार्यक्रम
- गृह सम्पर्क अभियान: स्वयंसेवकों द्वारा प्रत्येक घर तक पहुँचकर संवाद और संपर्क।
- हिन्दू सम्मेलन: बस्ती इकाई स्तर से लेकर बड़े समाजव्यापी आयोजन तक।
💡 भाव जागरण
“शून्य से एक शतक बनते, अंक की मन भावना।
भारती की जय-विजय हो, ले हृदय में प्रेरणा।”
विजयादशमी हमें केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संस्कार, संकल्प और जागरण का संदेश देती है।
🙏 उपसंहार
प्रिय बंधुओ, संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश करते हुए हमें आत्म-चिंतन कर अपने कर्तव्यों को दृढ़ता से अपनाना होगा।
विजयादशमी का यह उत्सव हमें सिखाता है कि—
- असत्य पर सत्य की विजय होती है।
- अन्याय पर न्याय की विजय होती है।
- और बिखराव पर संगठन की विजय होती है।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें—
“परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं”
👉 राष्ट्र को पुनः परम वैभव की ओर ले जाएँ।

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